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Dr.ksbhardwajLiterature

  1. प्रगति  कुत्तों से सावधान,  पढ़ कर,  वे चौंके,  कहने लगे,  "क्या प्रगति की है इंसान ने, कुत्ते कोठियों में रहने लगे? #डॉ_के_एस_भारद्वाज  2. व्यथा  आँखों के चिकित्सक ने  अपने मन की व्यथा, कुछ यूँ सुनाई,  "जो भी हमारे पास आया,  उसी नेन हमको,  आँख दिखाई." #डॉ_के_एस_भारद्वाज 3. महाभारत क्यों डींग मारते हो,  महाभारत की? भाई भाई के खून से  लिखी है वो कथा.    #डॉ_के_एस_भारद्वाज 4. आधुनिक संस्कृति  आधुनिक चेहरों पर  बनावटी छद्म मुस्कराहट, संवेदनहीनता एवं क्रूरता को, छिपाने की एक सफल  असफल  अकुलाहट, देवत्व प्राप्त करने की, एक असफल छटपटाहट.  #डॉ_के_एस_भारद्वाज 5. दो टूक  चिकनी चुपड़ी बातें, करनी नहीं आती, इसीलिए तो अपने भी, हो जाते हैं हमे खफा।   #डॉ_के_एस_भारद्वाज 6. तमन्ना  फरिश्ता कह कर  न दो तुम मुझे गाली, इंसान ही बना रहूँ ,  बस इतनी सी  तमन्ना है.  #डॉ_के_एस_भारद्वाज 7. हम क्या करें?  तनावों से घिरे हुए हुआ है पालन पोषण उनका,  हमे...