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Dr.ksbhardwajLiterature

  1. प्रगति  कुत्तों से सावधान,  पढ़ कर,  वे चौंके,  कहने लगे,  "क्या प्रगति की है इंसान ने, कुत्ते कोठियों में रहने लगे? अपने मन की व्यथा, कुछ यूँ सुनाई,  "जो भी हमारे पास आया,  उसी नेन हमको,  आँख दिखाई." #डॉ_के_एस_भारद्वाज 3. महाभारत क्यों डींग मारते हो,  महाभारत की? भाई भाई के खून से  लिखी है वो कथा.    #डॉ_के_एस_भारद्वाज 4. आधुनिक संस्कृति  आधुनिक चेहरों पर  बनावटी छद्म मुस्कराहट, संवेदनहीनता एवं क्रूरता को, छिपाने की एक सफल  असफल  अकुलाहट, देवत्व प्राप्त करने की, एक असफल छटपटाहट.  #डॉ_के_एस_भारद्वाज 5. दो टूक  चिकनी चुपड़ी बातें, करनी नहीं आती, इसीलिए तो अपने भी, हो जाते हैं हमे खफा।   #डॉ_के_एस_भारद्वाज 6. तमन्ना  फरिश्ता कह कर  न दो तुम मुझे गाली, इंसान ही बना रहूँ ,  बस इतनी सी  तमन्ना है.  #डॉ_के_एस_भारद्वाज 7. हम क्या करें?  तनावों से घिरे हुए हुआ है पालन पोषण उनका,  हमें मुस्कराते देख कर  वे और अधिक झूंझला गए।  #डॉ_के_एस_भारद...

अयोध्या से आई बेहद शर्मनाक तस्वीर गोदी मीडिया ने ली छुपाने की सुपारी Ram...

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✍️ ✍️ ✍️ ✍️ ✍️ ✍️ ✍️ ✍️ ✍️ ✍️ ✍️ ✍️ बाबर और मुगलों ने भी इतने मंदिर और घर न उजाड़े होंगे जितने मोदी की सनक ने घर उजाड़े, किसी ने न उजाड़े होंगे. 💯 💯 💯 💯 💯 💯 💯 💯 💯 💯 💯 💯 अयोध्या से आई बेहद शर्मनाक तस्वीर गोदी मीडिया ने ली छुपाने की सुपारी Ram... https://youtu.be/5MqFmd1qJ3M?si=BHzGfeWPmZPWyTs3 via @YouTube

मंच पर भावुक हो गए राहुल गांधी, मणिपुर से माफी मांगी...। Rahul Gandhi Sp...

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मणिपुर नाम, सुनते ही आंसू आ जाते हैं, कैसे उनके दुःख को जानें, कठिन बातें हैं.
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  मधुर स्मृतियाँ (कहानी) अचानक शशांक की नजर अपने शयन कक्ष की खिड़की पर जा टिकी थी. खिड़की में से अंदर झांकते हुए उसने जो देखा था, उस पर वह सकपकाया था और फिर मुस्करा दिया था. उसने देखा था कि विमला चैन से सो रही थी. विमला उसकी पत्नि थी. उसने देखा कि वह पसीने से लथपथ है मगर फिर भी गर्मी से एक दम बेखबर है. भयंकर गर्मी के बावजूद वह चैन से सो रही है. यह देख कर शशांक एक बार फिर से मुस्करा दिया था. शशांक फिर से क्यों मुस्कराया था? कहा न कि विमला पसीने से तरबतर थी. फिर भी गहरी नींद में डूब उतर रही थी. दोबारा मुस्कराने का कारण भी वही था. उसके बाद शशांक पुरानी यादों में खो गया था और अपनी उस बेचैनी को भूल गया था जिसने उसे कई घंटों से बेचैन कर रखा था. शशांक को अच्छी तरह से ज्ञात था कि अगर ढ़ोल नगाड़े भी बजते रहें तो भी उसकी प्रिय पत्नि को कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला. शशांक का अपनी प्रिय पत्नि की गहरी नींद से वास्ता पहली रात जिसे लोग मधुमास या सुहागरात कहते हैं, को ही पड़ गया था. जब वह अपने शयन कक्ष में गया तो वह घोड़े बेच कर सो रही थी. यह देख कर उसे बहुत अचरज हुआ था. जिस रात की नवयुग्ल बेसब्री और ...
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  मैं. मैं और मैं (कहानी) हम एकांत में रहते हैं. एकांत अच्छा लगता है. एकांत मुक्त करता है. एकांत एकाग्र होने में मदद करता है. अगर आपको समय का सकारात्मक और सृजनात्मक सदुपयोग करना है तो एकांत को चुनो. एकांत को अपनाओ. एकांत को जीओ, एकांत को पीओ, एकांत को खाओ, एकांत को ओढ़ो, एकांत को पहनो और फिर देखो एकांत आनंद. अरे आप तो ये पढ़ कर घबरा ही गए कि आज किस पागल लेखक से पाला पड़ा है जो एकांत को खाने, पीने, ओढ़ने, पहनने की कह रहा है. एकांत भी कोई खाने, पीने और ओढ़ने पहनने की चीज है? आपने ठीक कहा हमारे प्रिय प्रबुद्ध पाठक. एकांत में जीने, खाने, पीने और ओढ़ने का अर्थ है एकांत में ही खो जाओ. उसी में डूब जाओ जिससे किसी पुरुष को आभास न रहे कि कोई कमला, विमला, निर्मला भी है और स्त्री को आभास न रहे कि कोई मोहन, सोहन और त्रिलोचन भी है.  मगर एकांत के विपरीत अकेलापान काटता है. आजकल हम अकेलापन अनुभव कर रहे हैं. अकेलापन क्यों अनुभव कर रहे हैं? क्योंकि आजकल हम सिर्फ मैं, मैं, मैं, मैं, मैं, मैं, मैं, मैं, मैं, मैं, मैं, मैं, मैं, मैं, मैं, मैं ही सुनते रहते हैं. अब आप ही बताएं कि जब मैं, मैं, मैं, म...